दीपक चव्हाण की रिपोर्ट
*26 वर्षों के पश्चात् सन् 1998-99 में न्यू इंग्लिश स्कूल शिरसगांव के पूर्व छात्र जो एस.एस.सी. में थे, उन्होंने मिलन समारोह नहीं बल्कि खुशी में उत्सव मनाया।* सभी छात्र जो काम के कारण अलग-अलग स्थानों से थे, एकत्रित होकर अपने विद्यालय में उपस्थित हुए। और उन्होंने एक साथ खुशी का उत्सव मनाया। एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना समय की मांग बन गई है। हर कोई अपने परिवार को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास करता है। और जीवन के इस चक्र में शामिल होता है। लेकिन सुख-दुख में मित्र ही मित्र की सहायता करता है, अर्थात *”मित्र जंगल में बारिश की तरह होते हैं”* कोई कितना भी अमीर क्यों न हो जाए, वह अपने साथ कुछ नहीं ले जाएगा, इसलिए एक-दूसरे को समझना और एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना समय की मांग है। यह मिलन समारोह इस विचार को व्यक्त करने के लिए आयोजित किया गया था कि एक-दूसरे को समझना और एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना समय की मांग है।*
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- अभिषेक मिश्रा (सदाशिव मिश्रा ) , प्रधान सम्पादक , मो. 7317718183
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