April 17, 2026
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शिव कुमार की रिपोर्ट

शांभवी धाम कसेसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास वागीश जी महाराज ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा समुद्र की तरंगों जैसी है, जिसमें उत्थान और पतन दोनों निरंतर चलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष ने कभी विश्व गुरु के रूप में संसार का मार्गदर्शन किया, तो कभी दासता का भी दंश झेला। लेकिन हर कठिनाई के समय देश ने प्रभु श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के धर्म, मर्यादा व जीवन मूल्यों से प्रेरणा पाकर उन्नयन का मार्ग खोजा।महाराज श्री ने वर्तमान समय में बच्चों को ‘डोरेमॉन’ और ‘पेपा पिग’ जैसे विदेशी कार्टून के स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं दिखाने को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि जब नन्द बाबा के घर उत्सव हो रहा था, तो दूसरी ओर पापी कंस की सेना नवजात शिशुओं का संहार कर रही थी। इस क्रम में मायावी पूतना श्रीकृष्ण को विषपान कराने आई, किंतु बालकृष्ण ने न सिर्फ विषपान कर लिया बल्कि पूतना को भी मोक्ष प्रदान कर दिया।कथा व्यास ने बकासुर और कागासुर वध प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब माता यशोदा भगवान श्रीकृष्ण की चंचलता से परेशान होकर उन्हें ओखल से बांध देती हैं, तब बालकृष्ण यमलार्जुन वृक्षों को उखाड़कर दो शापित आत्माओं का उद्धार कर देते हैं।कार्यक्रम में आयोजक शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनन्द स्वरूप ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रमुख अतिथियों में पूर्व मंत्री छट्ठू राम, भाजपा के जिला महामंत्री आलोक शुक्ला, आचार्य विकास उपाध्याय, आदर्श तिवारी ने भी अपने विचार रखे व आयोजन की सराहना की। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान की भव्य झांकी एवं आरती में सहभागी बने।अंत में ठाकुर जी की आरती के उपरान्त कथा का विश्राम हुआ। आयोजकों ने समस्त श्रद्धालुओं का आभार ज्ञापित किया और कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सद्गुण, नैतिकता और धर्म की चेतना जगाते हैं।

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अभिषेक मिश्रा
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अभिषेक मिश्रा (सदाशिव मिश्रा ) , प्रधान सम्पादक , मो. 7317718183

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