April 16, 2026
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विशाल गुप्ता की रिपोर्ट

मसौली बाराबंकी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय स्थित सभागार मे बुधवार को प्रसार संस्था एवं सॉंझा प्रयास के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमे जिसमे गैर सरकारी संगठनों के लोगो को सुरक्षित गर्भ समापन एवं गर्भ निरोधक सेवाओं को लेकर जागरूक किया गया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 अवधेश कुमार ने कहा कि भारत में प्रतिदिन 13 महिलाओं की असुरक्षित गर्भपात से संबंधित कारणों से मृत्यु हो जाती है और सैंकड़ों महिलाएं गंभीर जटिलताओं का सामना करती है। यानि देश में होने वाली मातृ-मृत्यु में से 8 प्रतिशत असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गये हो या उसे अनचाहे गर्भ के ठहरने की आशंका हो तो उसे बिना किसी देरी के नजदीकी आशा या एएनएम से संपर्क करना चाहिए या डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अगर गर्भधारण की पुष्टि हो जाती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है, तो उसे गर्भपात का निर्णण जल्दी से लेना चाहिए। यदि लिंग जॉंच महिला के निर्णय का आधार न हो और यदि गर्भ 20-24 तक का हो तो संषोधित एमटीपी एक्ट 2021 के तहत गर्भपात कराया जा सकता है। अगर गर्भ 9 सप्ताह तक का हो तो गोलियों द्वारा गर्भपात भी किया जा सकता है। गर्भपात जितना जल्दी कराया जाये उतना ही सरल और सुरक्षित होता है।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ राजीव सिंह ने कहा कि एक महिला के लिए गर्भपात एक मुश्किल निर्णय हो सकता है और वह प्रक्रिया के दौरान कई की भावनाओं का अनुभव करती है। उसके पति एवं परिवार को महिला के निर्णय में सहयोग देना चाहिए और उसकी सुरक्षित और कानूनन सेवाएं लेने में मदद करनी चाहिए। सही जानकारी और आपसी सहयोग से हम देश में हो रही असुरक्षित गर्भपात संबंधित जटिलताओं की संख्या कम कर सकते हैं।
कार्यक्रम संयोजक अभिषेक सिंह ने कहा कि सरकार अपने विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर इस कुरीति को दूर करने के लिए कृतसंकल्पित है वहीं गैर सरकारी सगठनों का एक नेटवर्क सॉंझा प्रयास अपने साथी संस्थाओं के साथ इस मुद्दे पर निरन्तर प्रयासरत है। इसी कडी में आज का यह कार्यक्रम संस्थाओं के साथ किया जा रहा है। प्रसार संस्था के सचिव शिशुपाल ने बताया कि एमटीपी एक्ट संषोधन 2021 के मुख्य पांच बदलाव – पहला-विषेष श्रेणियों की महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी सीमा 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दिया गया। दूसरा -पर्याप्त भ्रूण विकृति के मामलों में, गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भपात, मेडिकल बोर्ड की अनुमति से कराया जा सकता है। तीसरा-गर्भनिरोधक साधनों की विफलता की स्थिति में अब गर्भपात की सेवा, अविवाहित महिलाओं के लिए भी उपलब्ध है। चौथा- 20 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए केवल एक प्रषिक्षित डॉक्टर और 20 से 24 सप्ताह के लिए 2 प्रषिक्षित डॉक्टरों की राय जरूरी है। पॉंचवा- किसी भी महिला की गर्भपात सम्बन्धी जानकारी की गोपनीयता के सुदृढ़ीकरण की जानकारी दी गयी।

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अभिषेक मिश्रा
अभिषेक मिश्रा
अभिषेक मिश्रा (सदाशिव मिश्रा ) , प्रधान सम्पादक , मो. 7317718183

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